फिर तेरी याद आई....
फिर शाम हुई, और वही घटा छाई,
फिर एक उम्मीद जगी, मैंने तेरे लिए यह पलकें बिछाई,
फिर मुस्कुराया मैं, और तू खुशी लेकर मेरे ख्यालों मैं समाई,
फिर वही रौनक लौटी, मैंने एक सपनों की दुनिया बसाई,
फिर किसी ख्वाइश ने जन्म लिया, और रौशनी की एक किरण जगमगाई ,
फिर से बरसे बादल, और दुनिया बारिश में नहाई,
फिर नहीं रहा कोई डर, मुझे नही देनी पड़ी कोई सफाई,
फिर एक तसल्ली मिली, जब तू मेरे कानों में कुछ फूस-फुसाई,
पर हर बार की तरह, फिर से हुई वही कमबख्त जुदाई,
मौसम बदला,रंग बदले और ख्वाब टूटा,
फिर नींद खुली, और मेरे सामने हकीकत आई,
फिर वही ग़म, अंधेरे ने अपनी चादर फैलाई,
फिर तेरे नहीं होने को मैंने महसूस किया, मेरी आंखों ने अश्कों की नदी बहाई,
फिर सोचा की मैं क्या करूँ, कुछ नही कर पाने ने मेरी जिंदगी और उलझाई,
फिर मन को बहलाया मैंने, 'जो होगा अच्छा होगा' यह कहकर एक झूठी तसल्ली दिलाई,
फिर से उसी ख्वाब को जीने की इच्छा जगी, ' पर ख्वाब तो सिर्फ़ एक छलावा है ' मैंने दिल को यह बात समझाई,
फिर सब उम्मीदें टूटी, और मैंने आखिरकार यह सचाई अपनाई,
फिर तेरी याद आई....
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